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क्यों होते है खून खराबे इस जहां में -A hindi poem on reality of life

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क्यों होते है खून खराबे इस जहां में- A hindi poem on reality of life... नमस्कार दोस्तो आज फिर हाज़िर हूं आपके सामने मेरी एक और नयी कविता लेकर यह कविता आपसे एक सवाल पूछेगी आपको सोचने पे मजबूत करेगी, कुछ नया सिखाएगी  ..थोड़ा मन लगाके इस कविता को पढ़िएगा , मै उम्मीद करता हूं कि  दिल जरूर छुएगी... तो  चलिए शुरू करते है। Tags: # Hindi poems about life  # poems in hindi .# poems about life # realistic poem #inspirational poems in hindi # क्यों होते है खून खराबे इस जहां में क्यों होते है खूून खराबे इस जहां में ! यह जो लहू है इंसान का इससे होली खेलने की इजाजत  क्या तुम्हे सरकार ने दी है या जहां तुम रहते हो वहां नफरत को ज्यादा आजादी है और प्यार को कहीं काल कोठरी में रखा जाता है? क्यों होते है खून खराबे इस जहां में दुनिया की नजर नीले आसमां पर है पर मुझे तो फिक्र इस धरती की है जो मटमेले रंग से लाल हुई जा रही है वैसे रंग तो सारे ओढ़ रखे है सबने किसी ने भगवा ,किसीने हरा तो किसीने सफेद पर रंग इंसानियत का ओढ़ने की कोई हिमाकत नहीं करता, चारो और फैली नफरत में प्यार कोई नहीं भरता...

चल हवाओं का रुख मोड़ते चल।

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चल उम्मीदों की डोरी से ख्वाब अपने बुनते चल चल झूठ की इस दुनिया में,सच को चुनते चल। दर्द हे जो सीने में ,उसे सहता चल  चल इस ज़िन्दगी के समन्दर में अपने हौसलों कि नाव में बहता चल। जिन विचारो ने चारों और से घेरा है तुझे  चल अब उन्हें भी अपनाता चल। जो बीच रास्ते में साथ छोड़ चले गए, उनसे अब उम्मीद छोड़ता चल , जिन हवाओं ने सब कुछ उजाड़ा था  चल अब उनका रुख मोड़ता चल। मुश्किल है , मुश्किलात में है जिंदगी अभी चल हिम्मत की लाठी लेे ,और इन्हें हटाता चल, जैसे गणित की बाकी में ,एक संख्या में से दूसरी संख्या घटाते है। चल वैसे ही ज़िन्दगी रूपी इस विशाल संख्या में से  मुसीबत रूपी संख्या को घटाता चल। चल नकारात्मक विचारो के इस भाग को तोड़ता चल और शेषफल जो बच जाए,उसमें सकारात्मक विचारो को जोड़ता चल। बस रुक जाना नहीं, कुछ भी हो झुक जाना नहीं , चल दर्द की इस चिंगारी से सीने में मशाल जला और बस  चलते चल, राह में जो रोड़े बन बैठे है ,चल अब उन्हें मसलते चल।