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गरम हवाएं/Hot_winds(A new Hindi poem)

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                              गरम हवाएं / hot winds( A new Hindi poem)  This hindi poem i want to dedicate all  poor workers of india ,who always do thier  hard work in any situation ,, The hot winds rip them off, yet they continue to work. ,, A lot of fire is already burning in their chest, this hot winds from above, are provoking this fire more.. ...….................*************************........................ यह गरम हवाएं ,आग और भड़का रही है दिमाग अब सवाल पूछने लगा है, चमड़ी अब जवाब देने लगी है पत्थरों पर गिरते हथोड़े की आवाज़ , ऐसे लग रही है, जैसे यह पत्थरों की नहीं, मेरे हौसलो के बिखरने की आवाज़ है। यह गरम हवाएं ,आग और भड़का रही है, लगातार मेरे तन से निकलता यह पसीना भी जैसे आग में घी का काम कर रहा हो, कंठ सूखता जा रहा है,, प्यास बढ़ती जा रही है , और शरीर की शक्ति कम होती जा रही है। यह गरम हवाएं ,आग और भड़का रही है कोई दावानल जैसे सब कुछ खाक क...

खजाना-एक कचरा बीनने वाले की कहानी / khajana- story of a garbage picker

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खजाना -एक कचरा बीनने वाले की कहानी / khajana- story of a garbage picker. hello friends,,this poem basically is a story of a man who pick garbage ,, i tried to describe that how many problems do these peoples face in their daily routine ,, but even after all the troubles ,there is something that gives them satisfies ,, so lets find out what is it ?    By- ravindra_bhartiya रोज सवेरा होते ही, मैं एक झोला हाथ में लिए चल देता हूं एक अनचाहे सफर पर, तपती सड़क मेरे नंगे पैरों के लिए जुते बन जाती है और चिलमिलाती धूप मेरे लिए किसी छाते की भांति तन जाती है। किसी खजाने की खोज में एक खोजी बन जाता हूं, आंसू निकलते जाते है नयनों से,उन्हें थोड़ा पी कर मनमौजी बन जाता हूं। इस खजाने को पाने के लिए  ज्यादा कुछ नहीं बस थोड़े से पैरों में छाले,कंठ सूखा देने वाली प्यास, और मौत की पर्याय वो भूख ,जैसी कुछ छोटी मोटी किम्मत चुकानी होती है। पर कोई बात नहीं.... इन सब पीड़ाओं  पर आंसुओ का मरहम बराबर लगाते रहता हूं, कोई आग पनपती है सीने में, उस आग से ...